नई दिल्ली [भारत]: भारत की टेक कंपनियों ने 2025 की पहली छमाही में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस (फ्लेक्स स्पेस) की डिमांड में लगभग 50% का योगदान दिया है। हाइब्रिड वर्किंग वातावरण में एजिलिटी और टैलेंट तक पहुंच को प्राथमिकता देने के चलते यह तेजी देखी गई है।
फ्लेक्सिबल ऑफिस स्पेस कर्मचारियों को पारंपरिक ऑफिस के विपरीत, अपनी कार्य आवश्यकताओं के अनुसार बैठने और कार्यस्थल चुनने की सुविधा देते हैं। इस कारण टेक कंपनियों में इनके प्रति रुचि बढ़ी है।
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म Colliers की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के टॉप 7 शहरों में टेक सेक्टर ऑफिस स्पेस की डिमांड का मजबूत स्तंभ बना हुआ है। 2025 की पहली छमाही (H1 2025) में टेक कंपनियों ने 10 मिलियन स्क्वायर फीट से अधिक ऑफिस स्पेस लीज पर लिया, जो पारंपरिक ऑफिस स्पेस डिमांड का 40% है।
बेंगलुरु और हैदराबाद में सबसे अधिक टेक लीजिंग
भारत के सबसे बड़े टैलेंट क्लस्टर्स बेंगलुरु और हैदराबाद ने H1 2025 में लगभग 50% पारंपरिक ऑफिस स्पेस डिमांड में योगदान दिया। भारत का मजबूत टैलेंट ईकोसिस्टम, आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर और लागत प्रतिस्पर्धात्मकता, ग्लोबल टेक कंपनियों को आकर्षित कर रही है। Colliers के मैनेजिंग डायरेक्टर (ऑफिस सर्विसेज, इंडिया) अर्पित मेहरोत्रा ने कहा: “भारत वैश्विक इनोवेशन ईकोसिस्टम में एक पावरहाउस है, जहां स्किल्ड टैलेंट और रोजगार अवसरों की उपलब्धता के कारण ग्लोबल टेक्नोलॉजी फर्म्स निवेश कर रही हैं।” उन्होंने आगे कहा: “भारत के प्रमुख टेक शहर एशिया पैसिफिक क्षेत्र में कुल टेक टैलेंट का 69% हिस्सा रखते हैं। बेंगलुरु और हैदराबाद, जो क्षेत्र के सबसे बड़े टैलेंट क्लस्टर्स हैं, H1 2025 में लगभग 50% पारंपरिक ऑफिस स्पेस डिमांड को लीड कर रहे हैं।”
एशिया पैसिफिक में भारत का उभरता दबदबा
Colliers की ‘Global Tech Markets: Top Talent Locations 2025’ रिपोर्ट के अनुसार, एशिया पैसिफिक क्षेत्र ग्लोबल टेक टैलेंट हब के रूप में उभर रहा है, जिसमें दुनिया के टॉप 10 में से तीन लोकेशन (बीजिंग, बेंगलुरु और टोक्यो) शामिल हैं।
भारत और चीन ग्लोबल टेक टैलेंट में लगातार दबदबा बनाए हुए हैं, जबकि भारत के टॉप 6 शहर एशिया पैसिफिक में टेक टैलेंट एक्विजिशन में टॉप 10 में शामिल हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टेक्नोलॉजी सेक्टर में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) भारत के कमर्शियल रियल एस्टेट में तेजी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारत ने इनोवेशन, स्केलेबिलिटी और कॉस्ट एफिशिएंसी के साथ GCC विस्तार के लिए एक ग्लोबल हब के रूप में खुद को स्थापित किया है।
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